Monday, 30 October 2017

Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi/ सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी

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सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi

Sardar Vallabhbhai Patel Life Biography Essay in Hindi
सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय
सरदार वल्लभ भाई (Sardar Vallabhbhai Patel) भारत के राष्ट्रीय एकता के वो महान शिल्पकार थे जिन्होंने आजादी के बाद बिखरे रूप से राज्यों एंव देशी रियासतों को आपस में जोड़ने का महान कार्य किया जिनके बदौलत ही आज हमे इस आधुनिक भारत (India) का रूप देखने को मिलता है जिनके दृढ निर्णय लेने के क्षमता के कारण ही सरदार वल्लभभाई पटेल को “लौह पुरुष” (Iron Man of India) के उपनाम से भी जाना जाता है और जब जब भारत की एकता की बात की जायेगी तो सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम भी जरुर आएगा

तो आईये आज हम सभी सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवनी / Sardar Vallabhbhai Biography in Hindi को जानते ह

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल: – जीवन परिचय
Sardar Vallabhbhai Patel Biography Essay in Hindi
भारतीय स्वन्त्रन्ता संग्राम के सेनानी लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात राज्य के नडियाड में हुआ था इनके पिता का नाम झबेरभाई और माता का नाम लाडबा देवी था इनके पिता का परिवार की आजीविका का मुख्य स्त्रोत किसानी था ये अपने माता के चौथे सन्तान थे

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल बचपन से ही बहादुर थे एक बार इनके काख में एक फोड़ा हो गया जिनका खूब इलाज भी हुआ लेकिन वह फोड़ा सही नही हो रहा था तो इस इसपर वैध ने सलाह दिया की यदि इस फोड़े को गर्म लोहे से सेक दिया जाय तो ठीक हो सकता है लेकिन यह सुनकर उनके परिवार वाले गर्म लोहे के दागने के कल्पना मात्र से सिहर उठे किसी की हिम्मत नही हुई की कोई ऐसा करे, यह सब देखकर सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने साहस का परिचय देते हुए फोड़े को खुद से गर्म लोहे से दाग दिया और उफ्फ तक नही किये फिर वल्लभ भाई पटेल इस साहस को देखकर सभी नतमस्तक हो गये थे

बचपन से गरीबी और आर्थिक तंगी हाल में गुजारा करने वाले वल्लभ भाई पटेल के माता पिता को ऊची शिक्षा दिलाना चाहते थे ताकि उनकी गरीबी की परछाई उनके बेटे पर न पड़े जिसके कारण वल्लभ भाई पटेल की प्रारम्भिक शिक्षा उनके गाँव में हुई और इनकी अधिकतर पढाई स्वाध्याय से ही किया इस तरह वल्लभ भाई पटेल बचपन से अपने पिता के खेती के कार्यो में मदद करते हुए अपनी पढाई जारी रखी और एक बार तो मैट्रिक की परीक्षा में अनुतीर्ण हो गये लेकिन उन्होंने हार नही मानी और फिर दोबारा से पढाई जारी रखते हुए मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से एवकालकी परीक्षा भी दिया जिसमे वे पास हो गये और इस इस तरह उन्हें वकालत करने का मौका मिल गया फिर इसके बाद उन्होंने वकालत शुरू कर दिया ताकि उनकी पढाई का खर्च का बोझ उनके परिवार पर न पड़े

इस तरह वल्लभ भाई पटेल ऐसे केस सुलझाने लगे जिसको लोग हारा हुआ मान लिए थे इस प्रकार समय के साथ वल्लभ भाई पटेल की प्रसिद्धि भी बढने लगी थी और सन 1893 में मात्र 16 वर्ष की आयु में इनका विवाह झाबेरवा देवी के साथ हुआ था लेकिन वल्लभ भाई पटेल ने अपने पढाई के बीच में अपने पारिवारिक जीवन को बाधा नही बनने दिया और इस तरह आगे की पढाई भी जारी रखी और फिर अपने वकालत के पैसे से इतना पैसा इक्कठा कर चुके थे की वे विदेश जाकर वकालत की पढाई कर सकते थे फिर अपने बड़े भाई विट्ठलभाई के सहायता से वकालत की पढाई के लिए सन 1905 में इंग्लैंड चले गये और फिर 3 वर्षो की पढाई पूरी करने के बाद वे वापस भारत लौट आये और फिर वकालत की शुरू कर दिया

सन 1909 में वल्लभ भाई पटेल कोर्ट में एक केस लड़ रहे थे और इसी दौरान एक सन्देशवाहक एक चिट्ठी लेकर वल्लभ भाई पटेल के पास आया जिसे देखकर वल्लभ भाई पटेल तुरंत पढ़कर अपने जेब में रख लिए और फिर कोर्ट की कार्यवाही में लगे रहे और जब कोर्ट स्थगित हुआ तो सबको पता चला की वल्लभ भाई पटेल की पत्नी का देहांत हो चूका है इस पर न्यायधीश ने वल्लभ भाई पटेल से पूछा की “जब आपको पता चल गया था की आपकी पत्नी का देहावसान हो चूका है फिर भी आप अपने कार्य में व्यस्त रहे ऐसा क्यों” इस पर वल्लभ भाई पटेल ने कहा की “मै उस समय अपने फर्ज की सीमाओ में बधा हुआ मेरी पत्नी का जितना दिन मेरे साथ निभाना था वो तो निभाकर चली गयी इसपर भला मै अपने फर्ज से कैसे मुह मोड़ लेता इस पर मैंने भी किसी के जीवन का मोल लिया है और यदि मै यहाँ से फर्ज को बीच में ही छोड़कर चला जाता तो भला मेरा मुवक्किल मुझे कैसे माफ़ कर सकता है और मै किसी के साथ ऐसा अन्याय कैसे कर सकता हु इसलिए मेरा फर्ज उस समय मुझे जाने से रोक रखा था”

यह सब बाते सुनकर वहा मौजूद लोगो की आखे भर आयी, फर्ज के प्रति ऐसी मिशाल बहुत ही कम देखने को मिलते है जो शायद वल्लभ भाई पटेल के साहस के द्वारा ही ऐसा सम्भव हो सका था

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्वन्त्रन्ता सेनानी जीवन
Freedom Fighter Sardar Vallabhbhai Patel Essay in Hindi
वैसे तो सरदार वल्लभ भाई पटेल अंग्रेजी पोशाक और विदेशी कपड़ो के पहनावे बहुत पसंद करते थे लेकिन जब वे सन 1917 में महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के सम्पर्क में आये तो इनकी पूरी तरह से विचारधारा बदल गयी और महात्मा गाँधी के नीतियों से काफी प्रभावित थे और प्रत्यक्ष रूप से आजादी की लडाई में सरदार वल्लभ भाई पटेल अंग्रेजो के खिलाफ भाग लेने लगे थे और फिर गाँधी जी अगुवाई में इनके कई आन्दोलन में भाग लिए जो इस प्रकार है

                  खेडा संघर्ष
गांधीजी की अगुवाई में सरदार वल्लभ भाई पटेल का प्रथम आन्दोलन खेडा संघर्ष था उन दिनों गुजरात का खेडा का इलाका सूखे की चपेट से ग्रस्त था जिसके चलते भारतीय किसान अंग्रेजो को टैक्स देने की स्थिति में असमर्थ थे जिसपर अंग्रेज कोई सुनवाई नही चाहते थे फिर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गांधीजी और वहा के किसानो के साथ मिलकर अंग्रेज की नीतियों का जमकर विरोध किया जिसके चलते अंग्रेजो को भरी विरोध का सामना करना पड़ा और अंग्रेजो को वहा के किसानो का कर माफ़ करना पड़ा इस प्रकार स्वन्त्रन्ता सेनानी के रूप में सरदार वल्लभ भाई पटेल अंग्रेजो के खिलाफ पहली सफलता थी जो की इतिहास में खेडा संघर्ष के नाम से प्रसिद्द है
   
          बारडोली सत्याग्रह

बारडोली सत्याग्रह भारतीय स्वन्त्रन्ता संग्राम की एक प्रमुख घटना है यह घटना 1928 में गुजरात के बारडोली प्रान्त के लिए किसानो के लगान में अंग्रेजो ने 30% से अधिक वृद्धि कर दिया तो सरदार वल्लभ भाई पटेल वहा के किसानो के साथ मिलकर इस कर का अंग्रेजो के खिलाफ जमकर विरोध किया तो अंग्रेजी हुकुमत इस आन्दोलन को कुचलने के कई प्रयास किये लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल के अदम्य साहस और बुलंद हौसलों के आगे अंग्रेजो को झुकना पड़ा और अंग्रेजो को अपना फैसला बदलना पड़ा था इस आन्दोलन में वल्लभ भाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिसके कारण वहा के सभी लोगो ने इन्हें अपना सरदार घोषित किया था जिसके कारण वल्लभ भाई पटेल
“सरदार” की उपाधि मिली और आगे चलकर वल्लभ भाई सरदार वल्लभ भाई पटेल कहलाने लगे.

आजादी की लडाई में सरदार वल्लभ भाई पटेल की भूमिका
सरदार वल्लभ भाई पटेल महात्मा गांधीजी के आंदोलनों से काफी प्रभावित थे और गांधीजी के नेतृत्व में आजादी की लडाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिये, गांधीजी का कोई भी आन्दोलन जैसे असहयोग आन्दोलन, दांडी यात्रा, भारत छोडो आन्दोलन रहा हो उसमे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे जिसके कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल अंग्रेजो के आखो की किरकिरी बन चुके थे सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे बड़ी ताकत उनकी बुलंद आवाज थी जब ये बोलते सभी को एक सूत्र में बाध देते थे इस तरह सभी आंदोलनों में लोगो को जोड़ने का कार्य सरदार वल्लभ भाई पटेल बखूबी निभाते थे

सरदार वल्लभ भाई पटेल “लौहपुरुष” के रूप में भूमिका
Iron Man of India Sardar Vallabhbhai Patel in Hindi
15 अगस्त 1947 के बाद से भारत को आजादी मिलने के बाद से अखंड भारत की स्थिति बहुत ही ख़राब हो गयी थी अंग्रेज जाते जाते हमारे देश को दो टुकड़ो में बाट गये थे जिसके कारण हर हिन्दुस्तानी के मन में रोष था लेकिन भारत देश के 520 से अधिक देशी रियासते और स्वन्त्रत प्रदेश थे जो की सभी अपने तरह की आजादी देख रहे थे फिर हर कोई अपने राज्य में राज करना चाहता था लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल के कुशल नेतृत्व में सभी खंड खंड रियासतों को एक भारत में मिलकर नये भारत का निर्माण किया जो की बिना हिंसा के सभी राज्यों को आपस में मिलाना बहुत बड़ी बात थी जिस कारण से सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने दृढ निर्णय के कारण “लौहपुरुष” कहलाये
इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम देखने को मिलते है जिस प्रकार जर्मन नेता बिस्मार्क ने पूरे जर्मन को बिना हिंसा किये एकत्रित देश का निर्माण किया ठीक वैसा ही सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी भारत को अखंड भारत में अपने सुझबुझ का परिचय दिया था जिसके कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल को
“भारत का बिस्मार्क” भी कहा जाता है
सरदार वल्लभ भाई पटेल की मृत्यु

Sardar Vallabhbhai Patel Death Anniversary in Hindi
जो इस पृथ्वी पर जन्म लिया है उसे एक दिन इस दुनिया को छोड़कर जाना पड़ेगा यही सत्य है जब महात्मा गाँधी को गोली मारकर हत्या कर दिया गया तो सरदार वल्लभ भाई इस घटना से अत्यधिक छुब्ध हो चुके थे मन ही मन उन्हें बहुत गहरा आघात पंहुचा और फिर 15 दिसम्बर 1950 को मुम्बई में सरदार वल्लभ भाई पटेल को हार्ट अटैक आया और फिर सदा के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल इस दुनिया को छोडकर चले गये

सरदार वल्लभ भाई पटेल का सम्मान
Sardar Vallabhbhai Patel National Prize Aur Samman in Hindi
यद्यपि सरदार वल्लभ भाई पटेल उच्च शिक्षा लन्दन से प्राप्त किये लेकिन कभी उनके मन में किसी भी सम्मान पाने के लिए खुद इच्छुक नही थे जब भारत आजाद हुआ तो हर युवाओ के मन में यही चाहत थी की सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रधानमंत्री बने लेकिन खुद सरदार वल्लभ भाई पटेल गांधीजी का सम्मान करते हुए अपने को प्रधानमन्त्री पद की दौड़ से बाहर रखा था और स्वन्त्रत भारत के प्रथम गृहमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला
और फिर इनके मृत्यु के पश्चात 41 वर्षो बाद भारत सरकार द्वारा इन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न” सम्मान से सम्मानित किया गया जो की वह पुरष्कार उनके पौत्र विपिनभाई पटेल द्वारा स्वीकार किया गया.
सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में अहमदाबाद एअरपोर्ट का नाम “सरदार वल्लभ भाई पटेल अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा” रखा गया है
और फिर इनके सम्मान की कड़ी में उनके जन्मदिन के शुभअवसर पर 2013 में गुजरात सरकार द्वारा दुनिया की प्रतिमा स्मारक के रूप में सबसे ऊची मूर्ति “Statue of Unity” की स्थपाना का अनावरण हुआ और फिर इनके सम्मान में एक कड़ी बढ़ाते हुए 2014 में भारत के केंद्र सरकार द्वारा इनके जन्मदिवस को भारत का “एकता दिवस” के रूप में मनाया जाने लगा ह

पढ़े :- राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष निबन्ध और महत्व National Unity Day
सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से यह साबित होता है की कोई भी व्यक्ति अमीर या महान बनकर नही पैदा होता है यदि जीवन में कठोर और कुछ करने की साहसिक निर्णय लेने की क्षमता हो तो कोई भी व्यक्ति अपने कर्मो की बदौलत महान बन सकता !ै

सरदार वल्लभभाई पटेल के  अनमोल विचार और नार/ slogan

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          सरदार वल्लभभाई पटेल के                     अनमोल विचार और नार

Sardar Vallabhbhai Patel Ke Anmol Vichar in Hindi
लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रेरक अनमोल विचार और नार

भारत को राष्ट्रीय एकता सूत्र में बाधने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को लौह पुरुष (Iron Man) भी कहा जाता है उन्होंने भारत की आजादी की लडाई में अग्रणी भूमिका निभाई और भारत के आजाद होने पर भारत देश के प्रथम गृहमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया और अपने साहस भरे निर्णय से पूरे देश को एकता के सूत्र में बाधने का कार्य किया जिनके कारण आज इनके जन्मदिवस 31 अक्टूबर को “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में मनाया जाता है
इसे भी पढ़े :- राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष निबन्ध और महत्व National Unity Day
तो आईये सरदार वल्लभभाई पटेल के अनमोल विचार और नारे को जानते है
सरदार वल्लभभाई पटेल के महान अनमोल विचार और नारे

Sardar Vallabhbhai Patel Mahan Anmol Vichar Aur Slogan in Hindi

अनमोल विचार :- 1 बोलते समय कभी भी मर्यादा का साथ नही छोड़ना चाहिए, गालिया देना तो बुजदिलो की निशानी है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 2 जब वक्त कठिन दौर से गुजर रहा होता है तो कायर बहाना ढूढ़ते है जबकि बहादुर साहसी व्यक्ति उसका रास्ता खोजते है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 3 हमारे देश की मिट्टी में कुछ अनूठा है तभी तो कठिन बाधाओं के बावजूद हमेसा महान आत्माओ का निवास स्थान रहा है
   
       सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 4 हमारे जीवन की डोर तो ईश्वर के हाथ में है इसलिए चिंता की कोई बात नही हो सकती है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 5 ज्यादा बोलने से कोई फायदा नही होता है बल्कि सबकी नजरो में अपना नुकसान ही होता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 6 अविश्वास भय का कारण होता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 7 हमे अपमान सहना भी सीखना चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 8 शत्रु का लोहा चाहे कितना भी गर्म क्यू न हो जाये पर हथौड़ा तो ठंडा रहकर ही अपना काम कर देते है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 9 मेरी यही इच्छा है की अपना देश भारत एक अच्छा उत्पादक बने जीससे कोई भूखा न हो और न ही अन्न के लिए किसी को आसू बहाना पड़

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 10 जनशक्ति ही राष्ट्र की एकता शक्ति है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 11 यह सत्य है की पानी में जो लोग तैरना जानते है वही डूबते है मगर किनारे खड़े वाले नही, लेकिन ऐसे लोग कभी तैरना भी नही जान पाते है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 12 उतावले उत्साही व्यक्ति से बड़ा परिणाम निकलने की आशा नही रखनी चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 13 जीवन में सबकुछ एक दिन में तो नही हो जाता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 14 अगर आपके पास शक्ति में कमी है तो फिर आपके विश्वास का कोई काम नही, क्यूकी महान कार्यो के लिए शक्ति और विश्वास दोनों का होना जरुरी है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 15 जब तक इन्सान अपने अंदर के बच्चे की भावना को जिन्दा रख सकता है तबतक उसका जीवन अंधकारमय छाया से दूर रह सकता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 16 जिसका कोई भी मित्र न हो उसका भी मुझे मित्र् बन जाना मेरे स्वाभाव में है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 17 आपके अच्छाई आपके मार्ग में बाधक बन सकते है इसलिए आप अपनी आखो को गुस्से से लाल कर सकते है लेकिन अन्नाय का मजबूत हाथो से सामना करना चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 18 यदि हम अपनी हजारो की दौलत गवा भी दे तो हमे मुस्कुराते रहना चाहिए और हमे सत्य और ईश्वर अपर विश्वास रखना चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 19 इन्सान जितना सम्मान करने योग्य है उतना ही सम्मान करना चाहिए उससे अधिक नही करना चाहिए क्यूकी उससे अधिक उसके नीचे गिरने का डर रहता है
सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 20 अब हमे उचनीच, अमीर-गरीब और जाति प्रथा के भेदभावो को समाप्त कर देना चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 21 गरीबो की सेवा करना ईश्वर की सेवा ह

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 22 जबतक हमारा अंतिम ध्येय प्राप्त न हो तबतक हमे कष्ट सहने की शक्ति हमारे अंदर आती रहे यही हमारी सच्ची विजय है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 23 जीवन में जितना दुःख भोगना लिखा है उसे तो भोगना ही पड़ेगा तो फिर व्यर्थ में चिंता क्यू करना ?

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 24 जो लोग तलवार चलाना जानने के बाद भी अपनी तलवार को म्यान में रखते है उसे ही सही अर्थो में सच्ची अहिंसा कहते है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 25 त्याग के सच्चे मूल्य का पता तभी चलता है जब हमे अपनी सबसे कीमती चीज को भी त्यागना पड़ता है जिसने अपने जीवन में कभी त्याग ही नही किया हो उसे त्याग के मूल्य का क्या पता

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 26 हमारे देश में अनेक धर्म, अनेक भाषाए भी है लेकिन हमारी संस्कृति एक ही है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 27 मान सम्मान किसी के देने से नही बल्कि अपनी योग्यता के अनुसार ही मिलता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 28 हर भारतीय का प्रथम कर्त्यव्य है की वह अपने देश की आजादी का अनुभव करे की उसका देश स्वतंत्र है और हमे इस आजादी की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 29 हमे यह भूल जाना चाहिए की हम सिख है, जाट है या राजपूत है, हमे तो बस इतना रखना चाहिए की हम सबसे पहले भारतीय है जिसके पास इस देश के प्रति अधिकार और कर्तव्य दोनों है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 30 यदि सत्य के मार्ग पर चलना है तो बुरे आचरण का त्याग भी आवश्यक है क्यूकी बिना चरित्र निर्माण के राष्ट्रनिर्माण नही हो सकता है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 31 सेवा धर्म बहुत ही कठिन है यह तो कठिन काँटों के सेज पर सोने जैसा है

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 32 यदि आप सेवा करने वाले है तो आपको विनम्रता भी सीखनी चाहिए क्यूकी वर्दी पहन कर सिर्फ रौब नही बल्कि विनम्रता भी आनी चाहिए

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

अनमोल विचार :- 33 ऐसे बच्चे जो मुझे अपना साथ दे सकते है अक्सर उनके साथ मै हंसी मजाक करता हु

सरदार वल्लभभाई पटेल Sardar Vallabhbhai Patel

National Unity Day / राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष निबन्ध और महत

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राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष निबन्ध और महत्व National Unity Day

Rashtriya Ekta Diwas National Unity Day Essay in Hindi
राष्ट्रीय एकता दिवस पर निबन्ध हिंदी में
हमारे देश भारत की पहचान अनेकता में एकता है शायद यही कारण है की पूरे विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहा पर विभिन्न धर्म, संप्रदाय, जाति के लोग आपसी प्यार और सदभावना के साथ एक दुसरे का सम्मान करते हुए रहते है और सभी अपने धर्मो का पालन करते हुए देश अखंडता को बनाये रखे हुए है यही भारत देश की सबसे बड़ी ताकत अनेकता में भी एकता है
राष्ट्रीय एकता दिवस
31 October Rashtriya Ekta Diwas Essay in Hindi
आजादी में अग्रणी भूमिका निभाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिवस को सर्वप्रथम 2014 में भारत के केन्द्रीय सरकार द्वारा इस दिन को “राष्ट्रीय एकता दिवस” के रूप में मनाने का फैसला किया गया और इस दिन सभी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के कार्यो को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजढ़े :

राष्ट्रीय एकता दिवस पर भाषण
National Unity Day Speech in Hindi
किसी भी देश की ताकत सभी भारतीय आपस उस देश की एकता में निहित होती है और यदि देश बड़ा और विभिन्न धर्म, भाषा के लोग रहने वाले हो तो उन्हें एकता की डोर में बाधकर रखना मुश्किल होता है लेकिन हमारे देश भारत की सबसे बड़ी यही खूबसूरती है की इतने धर्म, संप्रदाय, जाति के बावजूद आपस में मिलजुलकर रहते है और देश के एकता को बनाये रखे हुए है
हमारे देश भारत को आजादी मिलने के पश्चात हमारे देश में अनेक 500 से अधिक देशी रियासते थी जो की सबको आपस में मिलकर एक देश का गठन करना बहुत ही मुश्किल था, सभी रियासते अपनी सुविधानुसार अपना शासन चाहते थे लेकिन लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के सुझबुझ और इन रियासतों के प्रति अपनी स्पष्ट नीति के चलते इन्हें भारत देश में एकीकरण किया गया और इस प्रकार 3 देशी रियासते जूनागढ़, कश्मीर और हैदराबाद भारत में मिलने से मना कर दी जिसके पश्चात भारी विरोध के बाद जूनागढ़ का नवाब हिंदुस्तान छोडकर भाग गया, जिसके पश्चात जूनागढ़ भारत में मिल गया और कश्मीर के राजा हरीसिंह ने अपनी राज्य की सुरक्षा को आश्वासन लेकर कश्मीर को भी भारत में मिला दिया और अंत में हैदराबाद के निजाम ने जब भारत में मिलने से मना किया तो लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने तुरंत वहा सेना भेजकर निजाम को भी आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया जिसके पश्चात हमारे भारत देश का नवनिर्मित गठन हुआ जिसे संघ राज्यों का देश भी कहा जाता है और इस प्रकार अनेक होते हुए भी एक भारत का निर्माण हुआ
पढ़े :- सरदार वल्लभभाई पटेल के अनमोल विचार और नार

        राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व
Rashtriya Ekta Diwas ka Mahatva
कोई भी देश तभी तक सुरक्षित रहता है जबतक की उस देश की जनता और शासन में आपसी एकता और अखंडता निहित होती है हमारे देश की इसी आपसी एकता की कमी का फायदा उठाते हुए अंग्रेजो ने भारत में फूट डालो और राज करो की नीति पर हमारे देश में 200 से अधिक वर्षो तक राज किया, हमारी इस गुलामी के कई कारण थे जैसे भारत के सभी राज्यों, रियासतों में आपसी कोई तालमेल नही था सभी रियासतों के राजा सिर्फ अपनी अपनी देखते थे अगर कोई बाहरी शत्रु आक्रमण करे तो कोई भी एक दुसरे का साथ नही देने आता था यही अनेक कारण थे जिसके कारण हमारा देश इसी एकता के अभाव में विकास के राह से भटक गया और जो भी आया सिर्फ यहाँ लुटा और चला गया

अब चूकी हमारा देश आजाद है इसका मतलब यह नही है की हमारे देश पर कोई बुरी नजर नही डाल सकता है हम सभी को अपने देश अंदर उन आसामाजिक तत्वों से खुद को बचा के रखना है जो हमे आपस में बाटने को कोशिश करते है और साथ में देश के बाहरी दुश्मनों से भी चौक्कना रहना है तभी हमारा भारत भारत एक अखंड भारत बन सकेगा.

ऐसे में अब हमे अपनी आजादी मिलने के बाद हम सबकी यही जिम्मेदारी बनती है की जब भी देश की एकता की बात आये तो सभी भारतीयों को अपने धर्म जाति से उठकर सोचने की आवश्यकता है और एक सच्चे भारतीय भारतीय की तरफ कंधे से कंधा मिलाकर देश की अखंडता में अपनी अपनी भूमिका निभाना है
वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता दिवस की आवश्यकता और महत्व
National Unity Day Ki Avashykta Aur Mahatva

वर्तमान समय में हमारे देश भारत की अजीब स्थिति बनी हुई है पूरे देश में कही भी चले जाए तो लोग अपने आपको जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदि के आधार पर खुद को परिभाषित करते है कही भी कोई सबसे पहले खुद को भारतीय नही कहते हुए पाया जाता है जो की एक सोचने वाली बात है हमे यह बात जानना चाहिए की सबसे पहले हम भारतीय है बाद में कुछ अन्य जबकि आज के समय में ठीक इसका उल्टा है
जैसा की हमारे राष्ट्रगान में हमारी एकता का उल्लेख है –

जन-गण-मन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
विंध्य हिमाचल जमुना गंगा उच्छलजलधितरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे
गाहे तव जयगाथा
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता
अर्थात जन गण मन के उस अधिनायक की जय हो जिसने भारत का निर्माण किया है जो भारत का भाग्य विधाता है जिसका नाम सुनते ही पंजाब, सिन्धु, गुजरात, मराठा, द्रविड़ उत्कल बंगाल,विन्ध्य, हिमाचल, यमुना गंगा, यहाँ तक की हिन्द महासागर तक के बसने वाले लोगो में उत्साह की तरंगे उठने लगती है तेरे नाम से जाग उठते है और तेरी जय हो ऐसी हमेसा अभिलाषा रखते है
ऐसे में अब हम सभी का यही फर्ज बनता है की हम सभी अपने सविंधान के प्रति आदर का भाव रखते हुए अपने अपने देश में कानून, शासन का सही ढंग से पालन करे और जो हमे धर्म सम्प्रदाय आदि के आधार पर बाटने की कोशिश करे उनसे दूर रहकर देश की अखंडता में अपना योगदान दे तभी हम सभी राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व को सही ढंग से अपने देश में लागू कर सकते ह

राष्ट्रीय एकता दिवस कैसा मनाया जाता है ?
National Unity Day Kaise Manaya Jata Hai ?

राष्ट्रीय एकता दिवस हमारी राष्ट्रीय एकता के प्रतिक का त्योहार है इस दिन सभी नागरिको को राष्ट्रीय एकता का महत्व बतलाने के लिए विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते है इस दिन सरदार वल्लभभाई पटेल के मूर्ति पर माल्यार्पण करके उनके जन्मदिवस को मनाया जाता है तथा सभी भारतीय को यह शपथ भी दिलाया जाता है की वे भारत की अखंडता को हमेसा बनाये रखेगे
राष्ट्रीय एकता दिवस के दिन दिल्ली से लेकर देश विभिन्न शहरो में मैराथन दौड़ यानि Run For Unity (एकता की दौड़) का आयोजन किया जाता है जिसमे विभिन्न धर्म, जाति, सम्प्रदाय सभी तरह के लोग भाग लेते है जिसके माध्यम से देश के नागरिको को एकता का संदेश देने का प्रयास किया जाता है इसके अलावा नाटक, नुक्कड़ मंच आदि के द्वारा भी हमारी एकता की शक्ति को हमे अहसास कराया जाता है
राष्ट्रीय एकता के नारे

National Unity Day Slogan in Hindi

Slogan 1 :- अनेकता में एकता, यही हमारे भारत की विशेषता

Slogan 2 :- भिन्न भाषा भिन्न वेश, फिर भी भारत हमारा एक देश

Slogan 3 :- जाति पाती के नाता तोड़ो, भारत को एकता की ताकत से जोड़ो

Slogan 4 :- हम एक है, एक रहेगे, यही है हमारा नारा

Slogan 5 :- हिदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में है हम सब भाई भाई